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दुनिया मानवजाति के लिए परीक्षा का स्थान

The world Testament place for mankind

दुनिया मानवजाति के लिए परीक्षा का स्थान
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डॉ अदनान उल हक़ खान,नागपुर

इस्लाम के तीन मौलिक सिद्धांतों में से तीसरा सिद्धांत परलोकवाद है. ब्रह्मंड का निर्माता एक ईश्‍वर है. ईश्‍वर ने यह संसार निर्थक और निरुपयोगी नहीं बनाया. मानवता को उत्पन्न करने के पीछे ईश्‍वर का कया उद्देश्य है. इस का जवाब स्वयं ईश्‍वर ने अपने अंतिम ग्रंथ कुरान में दिया है. अल्लाह ने जीवन और मृत्यु की रचना की ताकि इसके द्वारा इंसान की परीक्षा ले सके कि तुम में से कौन पुण्यकर्म करने वाला है. इसलिए यह विश्‍व बदला पाने का स्थान नहीं बल्कि कर्म स्थान है, मानवजाति के लिए परीक्षा का स्थान है.

कर्मफल प्राप्ति के लिए अलग से जीवन आवश्यक है. यह बात प्रत्यक्ष अनुभव से भी साबित होती है. दुनिया में अच्छे लोगों को अच्छा और बुरे को बुरा फल प्राप्त नहीं होता, बल्कि अनेक बार इसके विपरीत होता है. जैसे हिटलर, चंगेज खान आदि ने मानवता पर घोर अत्याचार किए लेकिन उनको इस विश्‍व में किसी प्रकार की सजा नहीं मिली. उल्टे उन्होंने आराम का जीवन बिताया. इससे यह स्पष्ट है कि यह विश्‍व परीक्षा का स्थान है, कर्मफल प्राप्ति का स्थान नहीं. दुनिया में दिक्कतें, संकट, सुख-दुख, ऐश व आराम यह प्रत्येक व्यक्ति के लिए अलग-अलग प्रश्नपत्र है. हर व्यक्ति को अपने प्रश्नपत्र के अनुसार अपने कर्मों का ईश्‍वर के सामने जवाब देना होगा.

ईश्‍वर (अल्लाह) पवित्र कुरान के अध्याय 55 के 26वीं आयत में कहता है 'प्रत्येक जीववात्मा को मारणासन्न होना है'. यह विश्‍व और इसकी प्रत्येक वस्तु नश्‍वर है. एक समय बिंदु पर जाकर यह ब्राह्मंड नष्ट हो जाएगा. इसके बाद संपूर्ण मानवजाति को दूसरा जीवन प्रदान किया जाएगा. इससे वह सच्चाई की राह पकडे. रहेगा. आज जीवन में शांति और न्याय प्रस्थापित करने के लिए परलोकवाद विचारधारा सबसे उत्कृष्ट है.

डॉ अदनान उल हक़ खान,नागपुर

Updated : 8 April 2022 12:14 AM GMT
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