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तरावीह की नमाज़ में हैं तन्दुरुस्ती के राज़

The secrets of health are in the prayer of Taraweeh

तरावीह की नमाज़ में हैं तन्दुरुस्ती के राज़
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रमज़ानुल मुबारक स्पेशल

तरावीह की नमाज़ में हैं तन्दुरुस्ती के राज़

------------------- बुशरा कुर्रतुल ऐन , नागपुर

तरावीह सिर्फ रमजान के महिने में पढ़ी जाने वाली नमाज़ है । पैगंबर हजरत मोहम्मद सल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इस नमाज़ को पढ़ा और पसन्द भी फरमाया । मुस्लिम अल्लाह के हर फरमान को अपनी ड्यूटी समझ कर उसका पालन करता है।

तरावीह शब्द तरवीह का बहुवचन है जिसका अर्थ है एक बार आराम करना जबकि तरावीह का अर्थ है कई बार आराम करना। तरावीह वह नमाज़ है जो इशा के बाद रमजान में जमाअत के साथ पढ़ी जाती है। तरावीह की नमाज़ों की संख्या बीस है, इसलिए हर चार रकअत के बाद थोड़ी देर रुक और सुस्ता कर नमाज़ अदा करना मुस्तहब है। इसलिए इस नमाज़ को तरावीह कहा जाता है।

रमजान में इबादतों के साथ जीवन व्यतीत करना एक बड़ा पुण्य का काम है। हज़रत अबू हुरैरा रज़ि से वर्णित है कि पवित्र पैगंबर हज़रत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम लोगों को रमजान की रातों में नमाज़ अदा करने के लिए प्रोत्साहित करते थे। बुखारी हदीस ग्रंथ में है कि हज़रत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा कि "जिस किसी व्यक्ति ने ईमान और अल्लाह की प्रसन्नता के साथ रमज़ान का क़याम किया उसके पिछले गुनाह को माफ़ कर दिए गए।" तरावीह की नमाज़ का समय इशा की नमाज़ के बाद और वित्र से पहले है ।

बता दें कि तरावीह की नमाज़ पढ़ने में अल्लाह सर्वशक्तिमान ने इंसानों के लिए असंख्य आध्यात्मिक, नैतिक और शारीरिक लाभ प्रदान किए हैं। उदाहरण के तौर पर जैसे कोई व्यक्ति दिन में रोज़ा रखकर रमज़ान के दिनों को कीमती बना देता है, उसी तरह रात में तरावीह की नमाज़ पढ़ कर वह अपनी रातों को उपयोगी बना सकता है, क्योंकि रमज़ान की इबादतों में दिन को रोज़े रखे जाते हैं तो रात की इबादत तरावीह मानी जाती है । अगर दिन की इबादत खाने-पीने से बचना है तो रात की इबादत तरावीह में क़ुरआन को सुनने और पढ़ने के लिए है।


तरावीह करने के शारीरिक लाभों में से एक यह है कि जब कोई व्यक्ति दिन भर भूखा, प्यासा और खाली पेट रहता है, तो वह शाम को अपना रोज़ा इफ्तार करता है, जिसमें वह कुछ खाता और पानी पीता है, जिससे उसके शरीर में शर्करा का स्तर अचानक बढ़ जाता है । इसलिए रमज़ान की रातों में पढ़ी जाने वाली तरावीह की नमाज़ रोज़ेदार में चीनी का स्तर नियंत्रित कर उसे अपने मूल स्तर पर वापस ले आती है और आदमी अपने सभी प्रकार के दुष्परिणामों से पूरी तरह से सुरक्षित हो जाता है।

आज वैज्ञानिकों ने इसे भी सिद्ध कर दिखाया है कि नमाज़ स्वस्थ के लिए बहुत अधिक लाभदायक है । रमज़ान में तरावीह की नमाज पढ़ने से शरीर की मांसपेशियों का व्यायाम हो जाता है। कुछ मांसपेशियां लंबाई में खिचती है, जिससे दूसरी मांसपेशियों पर दबाव बनता है । इस प्रकार मांसपेशियों को ऊर्जा हासिल होती है। इस प्रक्रिया को ग्लाइकोजेनों लिसस के नाम से जानते हैं। मांसपेशियों में होने वाली गति नमाज़ के दौरान बढ़ जाती है। इस वजह से मांसपेशियों में ऑक्सीजन और खुराक में कमी आ जाती है। रक्त वाहिकाओं में रक्त प्रवाह बढ़ जाता है । हृदय में रक्त प्रवाह में भी अधिकता आ जाती है। इससे हृदय की मांसपेशियों को भी मजबूती मिलती है

इफतार से पहले रक्त में ग्लूकोज़ और इन्सुलिन की मात्रा बहुत कम हो जाती है । लेकिन इफतार के एक घन्टे बाद शरीर में ग्लूकोज और इन्सुलिन का स्तर बढ़ने लगता है । फिर तरावीह की नमाज पढ़ने से ग्लूकोज की अधिक मात्रा यानी एक्सट्रा कैलोरी कम हो जाती है। तरावीह की नमाज़ पढ़ने से दिल और दिमाग को सुकून हासिल होता है । पांचों वक्त की नमाज़ और तरावीह की नमाज पढ़ने से फ्रेक्चर के जोखिम कम हो जाते हैं। हड्डियों की कमजोरी दूर हो जाती है और साथ ही जोड़ों में चिकनाई और उनके लचीलेपन में भी बढ़ोतरी पैदा होती है। तरावीह की नमाज में पवित्र क़ुरआन के दोहराने से याददाश्त में मजबूती हो आती है ।

तरावीह के बाद शरीर में स्फूर्ति और हल्कापन आ जाता है । डिप्रेशन से मुकाबला करने की क्षमता बढ़ जाती है शरीर और आत्मा को पाकीजगी और ताजगी प्राप्त होती है । जाने-माने शोधकर्ता डॉ. हर्बर्ट हेन्सन ने अपने शोध से साबित किया है कि तरावीह की नमाज़ के दौरान क़ुरआन की पंक्तियों को बार-बार सुनने और अल्लाह (ईश्वर ) के स्मरण से शरीर में सकारात्मक प्रभावों का उल्लेख किया है ।

Updated : 15 April 2022 8:29 PM GMT
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