Home > M marathi blog > भारत की मेहनतकश जनता का हित अमेरिका के साथ या चीन के साथ

भारत की मेहनतकश जनता का हित अमेरिका के साथ या चीन के साथ

The interests of the working people of India lie with America or with China.

जाकिर हुसैन - 9421302699

16000 किलोमीटर दूर बैठे अमेरिका से दोस्ती और सभी पड़ोसी देशों से दुश्मनी, ये कैसी विदेशनीति है कि चीन को घेरने के चक्कर में हम खुद घिरते जा रहे हैं? सरकार का तर्क है कि अमेरिका के साथ जाने से हमें आधुनिकतम तकनीकें मिल सकती हैं। मगर सच्चाई यह है कि हम अमेरिका या चीन दोनों मे से किसी के भी साथ जाते हैं, तो हमें दोनों से ही आधुनिकतम तकनीकें मिलने की आशा है। आधुनिक तकनीक के क्षेत्र में किसी भी मायने में चीन अमेरिका से पीछे नहीं हैं। बीते वर्ष अमेरिका ने वर्ल्ड इंटलेक्चुअल प्रॉपर्टी ऑर्गनाइजेशन में 58 हजार पेटेंट की अर्जियां दाखिल की जबकि चीन ने 59 हजार। हालांकि पहले अमेरिका नई तकनीकों के सृजन में अग्रणी रहा है मगर अब चीन अमेरिका से कहीं आगे बढ़ रहा है। मौजूदा स्थिति में यदि हम चीन के साथ मित्रता करते हैं तो हमें अमेरिका के मुकाबले ज्यादा तकनीकें तो मिल ही सकती हैं, इसके अतिरिक्त चीन की विशेषता मैन्युफैक्चरिंग में है और भारत की सेवा क्षेत्र में जैसे मेडिकल ट्रांस्क्रिप्शन, अनुवाद, सिनेमा इत्यादि में। ऐसे में चीन की मैन्युफैक्चरिंग और भारत के सेवा क्षेत्र के योग से हम विश्व में अपनी पैठ बना सकते हैं।

चीन 2011 में अमेरिका को पछाड़ सुपर पावर बन चुका है बस अमेरिका की तरह शेखी नहीं बघार रहा है। आज वित्तीय दृष्टि से चीन अमेरिका पर भारी पड़ रहा है। जंहा कोरोना के बीच अमेरिकी अर्थववस्था माइनस 32.6 रेसियो से नीचे की ओर लगातार जा रही थी, वहीं चीन प्लस 11.5 की रेशियो से आगे बढ़ रहा था। अमेरिकी सरकार द्वारा जारी ट्रेजरी बांड चीन ने भारी मात्रा में खरीद रखे हैं। अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था में चीन का सूर्योदय हो रहा है, तो अमेरिका का सूर्यास्त! क्योंकि पूँजीवाद ने जितनी तरक्की करनी थी कर ली और अब पूँजीवाद अपने चरम सीमा से ऊपर है, अब इससे ज्यादा तरक्की पूंजीवादी सिस्टम नहीं कर सकता, क्योंकि पूँजीवाद अब इससे इससे आगे नहीं जा सकता। सबकी अपनी सीमा होती है। सर्वप्रथम आदिम कबिलाई युग फिर उसको पछाड़ कर दास युग, दास युग को पछाड़ कर सामंत युग, सामंत युग को पछाड़ कर पूँजीवाद का युग आया। जैसे जैसे एक ब्यवस्था को दूसरी ब्यवस्था ने पछाड़ कर एक नयी ब्यवस्था का उदय हुवा तो पिछली व्यवस्था की अपेक्षा समाज ने बहुत तरक्की की और तो और पूंजीवादी व्यवस्था ने समाज का तो बहुत ही ज्यादा विकास किया। मगर अब पूँजीवाद का समय खत्म हुवा और एक नयी व्यवस्था समाजवाद का युग आ गया है। पूँजीवादी व्यवस्था ने जो विकास किया अब उसी विकास को समाजवादी व्यवस्था उससे कंही आगे ले जाएगी।

शेष आगे अगले भाग में....

अजय असुर

Updated : 21 May 2022 9:41 AM GMT
Tags:    
Next Story
Share it
Top