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कश्मीर फाइल्स के पीछे की साजिश और कश्मीर त्रासदी का सच - भाग- 10

The Conspiracy Behind The Kashmir Files And The Truth Of The Kashmir Tragedy - Part 10

जाकीर हुसेन- 9421302699

18 सितंबर 1990 को स्थानीय उर्दू अखबार अफसाना के माध्यम से कश्मीरी पण्डित के. एल. कौल बताते हैं कि "पण्डितों से कहा गया था कि सरकार कश्मीर में एक लाख मुसलमानों को मारना चाहती है जिससे आतंकवाद का खात्मा हो सके। पण्डितों को कहा गया कि उन्हें मुफ्त राशन, घर, नौकरियों आदि सुविधाएँ दी जाएंगी। उन्हें यह कहा गया कि नरसंहार खत्म हो जाने के बाद उन्हें वापस लाया जाएगा।" इससे यह बात साफ स्पष्ट हो जाती है कि जगमोहन को कश्मीरी पण्डितों के सुरक्षा के लिये नहीं अपितु कश्मीरी पण्डितों को भागने और सांप्रदायिक माहौल को बनाने के लिये भेजा गया था।

जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव रहे अशोक जेटली कहते हैं कि "जगमोहन ने पाँच महीने में वह कर दिया जो आतंकवादी पाँच सालों में नहीं कर पाते।" खेला हो जाने के बाद 26 मई 1990 को ही जगमोहन को राज्यपाल पद से स्तीफा दिलाकर, इस खेल के इनाम के रूप में जगमोहन मल्होत्रा को तुरन्त ही भाजपा ने 1990 में ही राज्यसभा में एक मनोनीत सांसद बना दिया और 1999 में भाजपा की सरकार बनने पर अटल बिहारी की एनडीए सरकार में मंत्री पद देकर पुरुस्कृत भी किया।

1990 का वो जनवरी की हाड़-मांस को जमा देने वाली वो काली रात का दौर भूला नहीं जा सकता, जब प्रायोजित कार्यक्रम के तहत कश्मीरी पण्डितों पर जुल्म हुए उसके बाद बीजेपी ने कश्मीरी पण्डितों का मुद्दा मुसलमानों को विलेन साबित करने के लिए राष्ट्रीय मुद्दा बना लिया। जब तथाकथित आतंकवादियों (आर एस एस के गुण्डों) ने कश्मीर से वहां के पण्डितों को विस्थापित होने पर मजबूर कर दिया था।

घाटी में हिंसा अपने चरम पर थी और प्रदेश के हर कोने से दिन प्रतिदिन कश्मीरी पण्डितों के हत्या की खबर आती थी। लाखों की संख्या मे जब कश्मीरी पण्डित अपना घर छोड़ सरकारी शिविरों में रहने को मजबूर किये गये। आज उस दुखद घटना के तीन दशक बाद भी कितनी सरकारें आई और गई लेकिन कश्मीर घाटी में पण्डित वापस अपने घर नहीं लौटे हैं। 1999 में अटल बिहारी के नेतृत्व में पूरे 5 साल भाजपा का शासन रहा है और फिर इधर तथाकथित हिंदूवादी भाजपा सरकार पिछले 8 साल से केंद्र में बीजेपी की प्रचंड बहुमत की तथाकथित हिंदूवादीयों की सरकार है और कश्मीर से धारा 370 हटा चुके हैं। पर इन विस्थापित एक भी कश्मीरी पण्डित के परिवार को पुनर्स्थापित नहीं किया और ना ही उनके हितों का जरा भी ख्याल आया, ना ही इनके पुनर्वास की ओर कोई योजना बनाई और कुछ भी नहीं किया और ना ही कुछ कर रहें इन कश्मीरी पण्डितों के हइत में। करेंगे भी क्योँ? भाजपा के लिये कश्मीरी पण्डितों का कश्मीर से बाहर रहना ही हितकर है, नहीं तो ये कश्मीरी पण्डितों के नाम पर अपनी राजनीतिक रोटी कैसे सेकेंगे?

शेष अगले भाग में....

अजय असुर

Updated : 15 April 2022 2:59 PM GMT
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