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कश्मीर फाइल्स के पीछे की साजिश और कश्मीर त्रासदी का सच - भाग-2

The Conspiracy Behind Kashmir Files and the Truth of Kashmir Tragedy - Part-2

जाकिर हुसैन- 9421302699

भाग-2

कश्मीर त्रासदी को सिर्फ कश्मीरी पण्डितों पर हुवे जुल्म और उनके पलायन को ही कश्मीर समस्या दिखाया गया है। इस फिल्म पर कुछ लोग कहते हैं कि इस फिल्म में एकतरफा यानी एक पक्ष ही दिखाया गया है जो कि कश्मीरी पण्डितों का है। जबकि यह भी गलत है कि फिल्म एक पक्षीये भी नहीं है क्योंकि एक पक्षीये तब होता जब एक पक्ष को सही ढंग से दिखाते पर इस फिल्म में कश्मीरी पण्डितों के पलायन और उन पर हुवे जुल्म को दिखाने की आड़ में आर एस एस के मुस्लिम-विरोधी और कम्युनिस्ट-विरोधी एजेण्डे को बेहद फूहड़ और भौंडे़ रूप में परोसा गया है, जिससे देश की मेहनतकश जनता के दिलो-दिमाग में एक विशेष धर्म और कम्युनिज्म के प्रति नफरत और गुस्सा पैदा करने का काम करता है।

देश की समस्या के लिये कोई जिम्मेदार है तो वो मुसलमान है और कम्युनिस्ट! ऐसी सोच इस फिल्म से पहले भी तरह-तरह माध्यमों से मेहनतकश जनता के दिलो दिमाग में फर्जी समाचार, फर्जी विडियो, फर्जी लेख, फर्जी तथ्यों…. के माध्यम से ठूंस रहें हैं।

अब आप देंखे कि समस्या कश्मीर की है और कश्मीर त्रासदी पर फिल्म को दर्शाया गया है पर इस फिल्म में 2016 की जे एन यू दिल्ली कांड को बड़े ही शातिराना ढंग से जोड़ दिया गया है। यहां एक प्रोफेसर राधिका मेनन जो कि कम्युनिस्ट (वामपंथी) है, छात्रों के दिमाग से खेलती है और उन छात्रों को बरगला कर कश्मीर के आजादी की मांग करवाती है और भारत के टुकड़े होंगे के नारे भी लगवाती है और फिल्म में इस दौरान मार्क्स, लेनिन और माओ की तस्वीरों का भी बेशर्मी के साथ इस्तेमाल किया है और इनके साथ वामपंथ को इस शातिराने ढंग से दिखाया है कि देखने वालों के दिलो दिमाग कम्युनिस्टों के प्रति नफरत का भाव पैदा हो। यानी एक तीर से दो निशाने साधने की पूरी कोशिश किया गया है इस फिल्म के जरिये।

मुसलमान भले ही इस बात को न समझते हों मगर फासीवादियों को पता है कि कम्यूनिस्टों के प्रभावशाली भूमिका में रहते धार्मिक अल्पसंख्यकों का नरसंहार नहीं किया जा सकता।

इसीलिए आगे फिल्म के एक सीन में जे एन यू में जब प्रोफेसर राधिका मेनन कश्मीर में भारतीय सेना द्वारा किये गये ज़ुल्म की चर्चा करते हुए कश्मीर में पायी गयी 7000 से भी ज्यादा गुमनाम कब्रों का हवाला देती है तो फिल्म का एक किरदार कृष्णा जो कि प्रोफेसर मेनन का छात्र है, फौरन ही बोल पड़ता है कि "व्हाट अबाउट बट मजार?" जब प्रोफेसर राधिका छात्र कृष्णा से पूछती है कि ये "बट मजार" क्‍या है तो कृष्णा बताता है कि "बट मजार" वह है जहाँ एक लाख कश्मीरी हिन्दुओं को डल झील में डुबोकर मार डाला गया। इतने लोग मरे कि सिर्फ उनके जनेऊ से ही 7 बड़े टीले बन गये थे। इस फिल्म के इस सीन के डायलाग से इस दिखाये गये सीन का उद्देश्य पानी की तरह साफ नजर आने लगता है कि फिल्म को देखने वालों को ऐसा लगे कि मुस्लिम लोगों ने हिन्दुवों के साथ विशेषकर पण्डितों के साथ बहुत जुल्म और अत्याचार किये हैं और जब भी इन मुसलमानों को मौका मिला है ये चू

के नहीं हैं क्योंकि इस्लाम है ही बहुत कट्टर और इसी प्रतिक्रिया में ऐसी ही कट्टरता, कम्युनिस्टों और मुस्लिमों के प्रति नफरत और गुस्सा जनता के दिलो-दिमाग में भरना चाहते हैं, और ये कट्टरता इस हद तकहते हैं कि मुस्लिम औरतों का बलात्कार और मासूम बच्चों की गर्दन रेतने में भी कोई हिचकिचाहट ना हो। गजब का नरेटिव तैयार कर रहें हैं, ये फिल्म बनाकर।अजय असुर

शेष अगले भाग में....


Updated : 25 March 2022 3:49 PM GMT
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