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जैसी बची है,जितनी बची है, वैसी के वैसी बचालो ये दुनीया...

Save this world as it is, whatever is left...

जैसी बची है,जितनी बची है, वैसी के वैसी बचालो ये दुनीया...
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जैसी बची है,जितनी बची है,

वैसी के वैसी बचालो ये दुनीया...,

आज पृथ्वी दिवस है ၊

पब्लिक को बेवकूफ बनाने के लिये रेडियो और टीवी पर सरकार बता रही है कि जाओ एक पौधा लगा लो, देखो कम पानी से नहाया करो वगैराह वगैराह ၊

सरकार जनता को यह कभी नहीं बतायेगी कि सरकार का मुख्य काम ही प्रकृति को नष्ट कर मुनाफा कमाने वालों का साथ देने का है ၊

और सरकार का दूसरा काम है पृथ्वी को बचाने वालों को जेलों में ठूंसना,

पर्यावरण के लिये आवाज़ उठाने वालों की हत्या करवा देना और इस लूट के खिलाफ आवाज़ उठाने वालों को देशद्रोही कह कर सताना ၊

आपने नदी बचाने वाली मेधा पाटेकर के बाल खींचती हुई पुलिस की तस्वीरें नहीं देखीं क्या ?

छत्तीसगढ़ के जंगलों को बचाने की कोशिश करने वाली सोनी सोरी की कोख में पत्थर किसने भरे थे ?

सरकार ने ना ?

किसने उसके चेहरे पर तेज़ाब डाला था ?

इसी सरकार ने ना ?

सरकारी गुप्तचर एजेंसियां पृथ्वी बचाने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं की सूचियां तैयार कर रही है ၊

पर्यावरण के लिये आवाज़ उठाने के कारण कितने ही बुद्धिजीवी आज जेलों में पड़े हैं

लेकिन आपको क्या ?

आप रिलायंस-अंबानी, जिंदल , अडानी और तमाम मतलबपरस्त कॉरपोरेट घरानों की नौकरी करिये, और सरकार जी हजूरी ၊

इन्हें जंगल उजाड़ने दीजिये ၊

अपनी कार के पिछले शीशे पर वर्ल्ड अर्थ डे का स्टीकर या

आई लव माई अर्थ के मैसेज व्हाट्सएप पर भेज दीजिये ၊

आपका इतना ही दायित्व है ၊

~कॉपी

Updated : 23 April 2022 5:54 AM GMT
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