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इस्लाम और पर्यावरण संरक्षण --- पर्यावरण प्रेमी थे प्रेषित मुहम्मद (स)

5 जून पर्यावरण संरक्षण पर विशेष ---

इस्लाम और पर्यावरण संरक्षण    --- पर्यावरण प्रेमी थे प्रेषित मुहम्मद (स)
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5 जून पर्यावरण संरक्षण पर विशेष ---

इस्लाम और पर्यावरण संरक्षण

--- पर्यावरण प्रेमी थे प्रेषित मुहम्मद (स)

इस्लाम जीवन व्यतीत करने का सच्चा और सरल मार्ग है। जीवन के हर एक विषय में प्रेषित मुहम्मद (स) और पवित्र कुरआन ने मानव का मार्गदर्शन किया है। जल, जमीन, जंगल और वायु यह सब पर्यावरण के घटक हैं , परंतु यह मानवीय अत्याचार से ग्रस्त हैं। पानी प्रदूषित हो गया है, जमीन का प्लास्टिकीकरण हो गया है और जंगल नष्ट हो रहे हैं। वायु प्रदूषित होने से ग्लोबल वार्मिंग का खतरा बढ़ता जा रहा है। आज मानव को पर्यावरण संरक्षण का उपाय नहीं मिल रहा है। परंतु ईश्वर के अंतिम प्रेषित हजरत मुहम्मद (स) ने 14 सौ वर्ष पूर्व ही मानवता की इस समस्या के निराकरण का मार्ग बता दिया था।

पर्यावरण का महत्वपूर्ण घटक है जल । इसके विषय में पवित्र कुरआन के 21 वें अध्याय में कहा गया है कि ईश्वर ने पानी से प्रत्येक सजीव का निर्माण किया है। इसके अलावा कुरआन के 56 वें अध्याय में ईश्वर ने कहा है कि ईश्वर ने पानी को शुध्द रूप में निर्माण किया और शुध्दि प्राप्ति का जरिया बनाया। प्रेषित मुहम्मद (स) ने पानी के संरक्षण और उचित उपयोग का उपदेश दिया है। आप (स) ने कहा है कि पानी के झरने या नदी के पास रहने वाले ने भी 'वजु' (नमाज से पूर्व पानी व्दारा प्राप्त की गई शुध्दि) में अधिक जल का उपयोग नहीं करना चाहिए। इसके पश्चात आप (स) ने कहा है कि 'तुम (श्रध्दावान) में से कोई भी तालाब या भरे हुए जलाशय में पेशाब न करे । जल की बर्बादी के विषय में प्रेषित मुहम्मद (स) ने कहा है कि 'जो जल का नाश करता है वह पापी वृत्ति का होता है'। इस प्रकार जल संरक्षण के विषय में इस्लाम ने मानवता का मार्गदर्शन किया है।

वन संवर्धन के विषय में जंगल को संरक्षित घोषित कर मानव का प्रवेश, वृक्ष कटाई और वन्य प्राणियों के शिकार को निषिध्द घोषित करने का कानून 1878 में पारित हुआ। परंतु पर्यावरण प्रेमी प्रेषित मुहम्मद (स) ने सातवीं शताब्दी में ही मदीना शहर से 30 किलो मीटर याने 9 हजार वर्ग मीटर का जंगल प्रदेश हराम (ईश्वरदत्त निषिध्द) घोषित किया था। इस प्रदेश में पेड़ के पत्ते तोड़ना, वन्य पशुओं का शिकार ही निषिध्द नहीं है अपितु सिर की जूं भी मारना हराम है। वृक्ष कटाई के निषेध में और वन संरक्षण हेतु प्रेषित मुहम्मद (स) का कथन इस प्रकार था किसी व्यक्ति ने एक पेड़ लगाया और उसे बड़ा किया तो उस कार्य का समावेश सदके' (भलाई) में होगा'। 'किसी ने एक पेड़ तोड़ा तो वह नया पेड़ लगाए। उस समय महाप्रलय भी आ जाए तो भी पौधा लगाओ'। 'वृक्ष संरक्षण करने वाले व्यक्ति के लिए ईश्वर स्वर्ग में वृक्ष लगाएगा'। इस प्रकार इस्लाम ने पर्यावरण के संरक्षण के लिए उचित मार्गदर्शन किया है। इस्लाम की यही विशेषता है कि उसने जीवन के हर क्षेत्र के लिए मार्गदर्शन किया है। इस्लाम के पास सभी समस्याओं का उपाय मॏजूद है.


डा. अदनान उलहक खान, नागपुर।

Updated : 2022-06-04T09:31:09+05:30
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