Home > M marathi blog > भारत श्रीलंका बनने की ओर अग्रसर -भाग- 2

भारत श्रीलंका बनने की ओर अग्रसर -भाग- 2

India on its way to become Sri Lanka - Part-2

संपादक - 9421302699

श्रीलंका में आज जो आर्थिक संकट आया है वो आज की उपजी परिस्थियों या कोरोना से नहीं है, कोरोना तो एक बहाना है, बल्कि कई सालों से पनप रहा था, लेकिन बीते कुछ महीनों से हालात बदतर हो गए थे। इन बदतर हालातों ने लोगों को सड़क पर उतरने के लिए मजबूर कर दिया। गुस्साई भीड़ ने प्रधानमंत्री रहे महिंदा राजपक्षे का पैतृक घर आग के हवाले कर दिया। कई सांसदों के घरों को भी जला दिया गया। एक सांसद को तो कार समेत नहर में ढकेल दिया। भीड़ के गुस्से ने महिंदा राजपक्षे को इस्तीफा देने के लिए मजबूर कर दिया। प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे के पद से इस्तीफा देने के बाद भी लोगों का गुस्सा शांत नहीं हो रहा और यह प्रदर्शन हिंसक हो गया है। हंबनटोटा में राजपक्षे परिवार के पैतृक घर को प्रदर्शनकारियों ने फूंक दिया। इसके साथ ही कई मंत्रियों और पूर्व मंत्रियों के भी घर जला दिए गए हैं। हिंसा में अब तक एक सांसद सहित आठ लोगों की मौत हो गई है और 250 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। हिंसा को लेकर महिंदा राजपक्षे की गिरफ्तारी की भी मांग की जा रही है।

श्रीलंका पर कर्ज

कुछ तथाकथित बुद्धिमानों, दलाल मीडिया और भक्तों का तर्क है कि चीन ने अपने कर्ज के जाल में श्रीलंका को फंसाकर बर्बाद कर दिया है। आईये इसको भी समझने का प्रयास करते हैं।

IMF के अनुसार 2021 में श्रीलंका पर कुल कर्ज उसकी GDP का 109.250% था, जबकि भारत पर कुल कर्ज देश की GDP के 90.601% था। श्रीलंका पर विदेशी कर्ज तेजी से बढ़ा है। बता दें कि सन 2022 में श्रीलंका के लिए यही आंकड़ा बढ़कर 111.421% हो गया है। पर वर्तमान में अनुमान है कि इस समय श्रीलंका पर जीडीपी का 119% कर्ज हो गया है।

2010 में श्रीलंका पर 21.6 अरब डॉलर का कर्ज था, 2020 तक ये बढ़कर 56 अरब डॉलर के पार पहुंच गया। श्रीलंका पर विदेशी कर्ज 2010 में 21.6 अरब डॉलर, 2012 में 35.7 अरब डॉलर, 2014 में 42.2 अरब डॉलर, 2016 में 46.6 अरब डॉलर, 2018 में 52.9 अरब डॉलर, 2020 में 56.3 अरब डॉलर लिया। कर्ज के ये आंकड़े सेंट्रल बैंक आफ श्रीलंका के हैं जिसे आज तक ने उपलब्ध कराया है।

श्रीलंका ने बाजार से 47%, एशियन डेवलपमेंट बैंक से 13%, चीन से 10%, जापान से 10%, वर्ल्ड बैंक से 10%, भारत 2%, अन्य स्रोतों से 8%।

अब आप स्वंय देखें कि श्रीलंका को चीन ने कुल कर्जों में से मात्र दस फीसदी ही दिया है। चीन ने 2010 में हंबनटोटा पोर्ट डेवलपमेंट के लिए श्रीलंका को 1.26 अरब डॉलर का कर्ज दिया था। इसके बाद भी जरूरत पड़ने पर चीन ने श्रीलंका को कर्ज दिया और वो भी बिना किसी शर्तो के, तो चीन कैसे जिम्मेदार हो गया? और चीन द्वारा दिया गया कर्ज सबसे कम ब्याज दर वाला कर्ज है सभी कर्जों से और बिना शर्त का कर्ज है। श्रीलंका ने चीन से ये कर्ज हंबनटोटा पर एक बंदरगाह बनाने के लिये लिया था। श्रीलंका इस कर्ज के लिये पहले भारत और फिर अमेरिका के पास गया था पर दोनों ने ये कर्ज देने के लिये मना कर दिया। फिर श्रीलंका आई एम एफ और वर्ल्ड बैंक के पास ना जाकर सीधे चीन के पास गया क्योंकि आई एम एफ और वर्ल्ड बैंक अपनी शर्तो के अनुसार किसी भी देश को लोन देते हैं और देश के भीतर इनका हस्तक्षेप बढ़ जाता है। पर चीन ने कर्ज बिना शर्तो के दिया। श्रीलंका ने कर्ज लेकर ये पोर्ट तो बना दिया पर अपनी सोच के अनुसार वो रेवन्यू (राजस्व) जनरेट नहीं कर पाया और ये प्रोजेक्ट फेल हो गया। चीन ने इस लोन को पुनः रिस्टक्चर किया पर श्रीलंका चीन को कर्ज वापस नहीं कर पाया तो चीन ने 2017 में इस पोर्ट को 99 साल की लीज पर कब्जे में लेते हुवे आज 70% का मालिकाना ले लिया और 30% श्रीलंका को दे दिया। तो आप स्वंय देखें कि चीन कहाँ से और कैसे जिम्मेदार है श्रीलंका के दिवालिया होने में। अजय आसुर

शेष आगे अगले भाग 3 में

Updated : 5 Jun 2022 7:34 AM GMT
Tags:    
Next Story
Share it
Top