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भारत एक दुल्हन की तरह है और हिंदू, मुसलमान दुल्हन की दो खूबसूरत आंखों की तरह अगर एक आँख भी ख़राब हो गयी तो दुल्हन बदसूरत दिखेगी- सर सय्यद अहमद खान रहमतुल्लाह अलयही

India is like a bride and like two beautiful eyes of a Hindu and Muslim bride, if one eye is damaged, the bride will look ugly - Sir Syed Ahmed Khan Rahmatullah Alaihi

भारत एक दुल्हन की तरह है और हिंदू, मुसलमान दुल्हन की दो खूबसूरत आंखों की तरह अगर एक आँख भी ख़राब हो गयी तो दुल्हन बदसूरत दिखेगी- सर सय्यद अहमद खान रहमतुल्लाह अलयही
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27 मार्च यौमे वफात-

भारत एक दुल्हन की तरह है और हिंदू, मुसलमान दुल्हन की दो खूबसूरत आंखों की तरह अगर एक आँख भी ख़राब हो गयी तो दुल्हन बदसूरत दिखेगी-

-----------------सर सय्यद अहमद खान रहमतुल्लाह अलयही

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वो 1857 का दौर था , पूरा भारत आखरी मुग़ल बादशाह बहादुर शाह जफर के नेतृत्व में अपने आज़ादी के लिए एक हो रहा था।

लेकिन बदकिस्मती से ये आंदोलन फेल हो जाता है और अंग्रेजो का हुक़ूमत पूरे हिंदुस्तान पे फिर से क़ायम हो जाता है।

वो दौर बहुत अफरा तफरी का था। समाज टूट रहा और अंग्रेज मौके का फायदा उठा के समाज को तोड़ रहे थे

उस वक़्त एक शख्स खड़ा होता है जो के महान चिंतक, इतिहासकार, समाज सुधारक था।

उन्होंने ठान लिया था के बगैर आधुनिक शिक्षा के कोई भी क़ौम आगे नही बढ़ सकती।

उनका मानना था के अपने पिछड़ेपन पे मातम करने से बेहतर है के आगे बढ़ के उस पिछड़ेपन को दूर किया जाए।

उन्होंने ठान लिया के हिंदुस्तान में मुस्लिमो को आधुनिक शिक्षा से जोड़ दिया जाये ताके वो भी दुनिया से कदम से कदम मिला के चले ।

वो शख्स आगे बढ़ते है और अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी वजूद में आता है।

इस महान आदमी का नाम #Sir_Syed_Ahmed_Khan रहमतुल्लाह अलयही है।

आज 27 मार्च सर सय्यद अहमद रहमतुल्लाह अलयही की यौमे वफात का दिन है

मैं खुदा से दुआ करता हु के इनके क़ब्र को अल्लाह नूर से भर दे।

मेरा भी खुशनसीबी है के मेरा भी वास्ता सर सय्यद साहब के चमन से है जी हां मैं भी अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के बाग का नन्हा सा फूल हूँ ।

लेकिन सर सय्यद रहमतुल्लाह अलयही

का सफर इतना आसान नही था। खुद मुस्लिम समाज से लोगों ने उनका विरोध किया।

लेकिन सर सय्यद रहमतुल्लाह अलयही

अपने मिशन पे लगे रहे, गालियां सुनी, भीख तक माँगा ,लोगों ने उनपर थूका भी लेकिन सर सैयद की नजर 200 साल बाद तक थी ।

सारे जुल्म सितम सह कर भी वो पीछे नही हटे और इल्म की चिंगारी को रोशन कर ही दिया जिसको दुनिया #Aligarh_Muslim_University के तौर पर पहचानती है ,जो आज भी उसी मजबूती से रोशन है और करोड़ों लोगों ने उस रौशनी से अपनी ज़िंदगी को रोशन किया।

इसी सिलसिले में सर सय्यद अहमद साहब

रहमतुल्लाह अलयही ने अपने बेटे के साथ 1869 - 1870 में इंग्लॅण्ड का भ्रमण किया और वहीं से एक शिक्षा संस्थान खोलने की उनकी धारणा प्रारम्भ हुयी.

इंग्लैंड से लौट के आने के बाद उन्होंने एक अखबार निकाला , तहदीब अल अखलाक.यह उनका समाज सुधार का मुख पत्र था.

ब्रिटेन की यात्रा के दौरान उन्हें कैम्ब्रिज की तर्ज़ पर एक शिक्षा संस्थान स्थापित करने का विचार आया. हालांकि शिक्षा के क्षेत्र में उन्होंने काम करना शुरू कर दिया था.

1858 में ग़ाज़ीपुर , 1863 में मुरादाबाद में उन्होंने शिक्षा संस्थाओं की शुरुआत कर दी थी. ऐसा नहीं था कि यह संस्थाएं केवल मुस्लिमों के लिए ही थीं. बल्कि हिन्दू मुस्लिम दोनों के लिए ही थीं. मई 1875 में अलीगढ़ में एक एंग्लो मोहमडन स्कूल की स्थापना हुयी जो आगे चल कर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय बना.

Reference -

Mo umar ashraf

Heritage times

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संकलन अताउल्ला पठाण सर टूनकी बुलढाणा

Updated : 27 March 2022 5:05 AM GMT
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