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आखिर इस्लाम में ऐसी क्या बात है कि वे पूरे दुनिया पर छा गए? और तुम्हारे सनातन धर्म में ऐसी क्या बुराई रही है कि लोग तुम्हारा धर्म छोड़ते जा रहे हैं?

After all, what is such a thing in Islam that they dominated the whole world? And what has been so bad in your Sanatan Dharma that people are leaving your religion?

एक नफरती लेख पर हमारा जवाब

ज़ाकिर हुसैन - 9421302699


(एक लेख कई दिन से मीडिया में चल रहा है, इससे हमारी सहमति नहीं है। धर्म के नाम पर नफरत फैलाने वालों का लेख समझकर ही हम इसका जवाब दे रहे हैं। लेख इस प्रकार है-)

"1970 के आसपास अफगानिस्तान में लगभग 100000 (एक लाख) से अधिक सिख और 280000 (दो लाख अस्सी हज़ार) हिन्दू रहते थे.. आज 2022 में वहां सिर्फ़ 159 सिख और हिन्दू बचे हैं.. जिनमें से एक 140 सिख हैं और बाक़ी 19 हिन्दू.. बौध अब वहां हैं ही नहीं, लगभग 4 करोड़ की कुल अफ़गानिस्तान आबादी में, ये है अल्पसंख्यकों की आबादी.. कुल 156.. ये आबादी कैसे ख़त्म हो गयी इस पर कोई बात नहीं करता है.. खासकर मुसलमान भाई तो बिलकुल भी नहीं

कारगिल जैसे सुदूर और बीहड़ इलाक़ों में हमेशा सीधे साधे बौद्ध धर्म को मानने वाले रहते आये हैं.. मगर धीरे धीरे सरहद पार से आये इस्लामिक धर्म प्रवर्तकों ने आज वहां की 77% आबादी मुस्लिम बना दी है.. जिनमें 65% शिया मुसलमान हैं बाक़ी सब सुन्नी.. बौद्ध 14% बचे हैं और हिन्दू 8%.. अब समस्या ये है कि कारगिल में एक गोम्पा (बौद्ध मंदिर) है जो बहुत ही पुराना है.. अब हालात ये हो गए हैं वहां कि बौद्ध अपने उस पुराने मठ में पूजा अर्चाना नहीं कर सकते हैं.. बौद्ध समुदाय उस गोम्पा का पुनर्निर्माण और मरम्मत करना चाहते थे जिसकी इजाज़त वहां का मुस्लिम बाहुल्य समुदाय नहीं दे रहा है.. आजकल वहां इस बात को लेकर बहुत तनाव का माहौल है

ये सब ऐसे ही धीरे धीरे होता है और ऐसा होता है कि न तो दुनिया जान पाती है, और न ही वो इसके बारे में बात करती है.. पचास सालों में तीन लाख से घटकर कोई आबादी सिर्फ़ 19 हो जाती है मगर इतनी बड़ी समस्या पर न कोई कुवैत बोलता है और न ही कोई अन्य देश.. हां क़तर नुपुर शर्मा को फांसी पर लटकाने के लिए बावला हुवा जा रहा है

और आगे का हाल ये है कि अब चार करोड़ अफ़गानी मुसलामानों के बीच सिर्फ़ 140 सिख अफ़गानिस्तान में नहीं रह सकते हैं.. क़ाबुल में सिखों के गुरुद्वारे पर तीन दिन पहले हमला हुवा.. और भारत सरकार ने आनान फ़ानन में सभी सिखों और हिन्दुवों को वीज़ा दिया है ताकि उन सबको भारत में सुरक्षित रखा जा सके.. एक भी सिख को पाकिस्तान नहीं बुलाता है, एक भी हिन्दू को वो नहीं बुलाएगा.. एक भी सिख को क़तर नहीं बुलाएगा

अब जो बचे हुवे 19 हिंदू और 140 सिख हैं.. वो भी अफगानिस्तान में नहीं रहेंगे.. अब वहां 100% मोमिन रहेंगे.. वो क्यों रहेंगे वहां अकेले, बाक़ी धर्म के लोग क्यों नहीं रह सकते? किस तरह की तकलीफ़ दे रहे थे ये 159 लोग 4 करोड़ मोमिनों को?

इस पर कोई भी सवाल नहीं पूछेगा.. और न ही जिन भाईयों से हमें ये सवाल पूछना है वो इसका कोई जवाब देने में कोई रुचि रखते हैं.. क्योंकि उनके हिसाब से इस दुनिया की असल समस्या ये है कि नुपुर शर्मा अभी तक गिरफ्तार क्यों नहीं की गई?

~ Siddharth Tabish "

हमारा जवाब—

पहली बात तो ये है कि तुम्हारे आँकड़े आखिर इतिहास 1970 से ही क्यों शुरू कर रहे हो? इतिहास में तुम और अधिक पीछे क्यों नहीं जाते, जब हम सभी लोगों के पुरखे पाषाण युग में थे। हम लोग उन्हीं पथरकट्टों, आखेटकों(खटिकों) के ही वंशज हैं, जिनका कोई धर्म नहीं था, वे हिन्दू मुस्लिम, सिक्ख, इसाई, यहूदी, पारसी, जैन, बौद्ध नहीं थे। इसके बाद निजी सम्पत्ति का समाज बना, जिसमें दास और दास मालिक होते थे। दासों के ऊपर भयानक अत्याचार हो रहे थे। अत्याचार सहने वाले और अत्याचार करने वाले दोनों का धर्म एक ही था। सामंती युग में भी किसानों और भूदासों पर हृदय विदारक अत्याचार हुए। 90% मामलों में अत्याचार करने वालों का धर्म वही रहा है, जो अत्याचार सहने वालों का धर्म हुआ करता था। आज भी हमारे देश में शोषक वर्ग मँहगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, सूदखोरी, जमाखोरी, मिलावटखोरी, अंधविश्वास, अश्लीलता आदि तरीकों से अपने ही सहधर्मी गरीबों का खून चूस रहा है। अपने ही धर्म के 90% मेहनतकशों को नीच, अछूत, अन्त्यज कहकर उसे हजारों साल से तिरस्कृत, अपमानित, प्रताड़ित करने वाले 10% लोगों का कोई अलग धर्म नहीं है। दोनों का धर्म एक ही है। गरीब सवर्णों का खून सिर्फ विदेशी या विधर्मी ही नहीं चूस रहे हैं, उनके सजातीय और उनके सहधर्मी भी खून चूसने में पीछे नहीं हैं। इसी तरह अफगानिस्तान समेत सारे मुस्लिम देशों में अमीर मुसलमान ही गरीब मुसलमानों का शोषण करते हैं। क्रिश्चियन देशों में अमीर क्रिश्चयन ही गरीब क्रिश्चियनों का शोषण करते हैं। अपने इसी शैतानी चरित्र पर पर्दा डालने के लिए सभी धर्मों के शोषक लोग जनता को धार्मिक झगड़े में उलझाते हैं।

सिर्फ 1300 साल पीछे जाइए, अफगानिस्तान में एक भी मुसलमान नहीं था, सिख भी नहीं थे।

आखिर इस्लाम में ऐसी क्या बात है कि वे पूरे अफगानिस्तान पर छा गए? और तुम्हारे सनातन धर्म में ऐसी क्या बुराई रही है कि लोग तुम्हारा धर्म छोड़ते जा रहे हैं?

अगर तुम कहते हो कि तलवार के बल पर इस्लाम फैला है, तो प्रकारान्तर से यह सिद्ध कर रहे हो कि सनातन धर्म के लोग कायर थे, जो तलवार के आगे झुक गए।

अगर तुम कहते हो कि पैसा-कौड़ी देकर धर्म परिवर्तन कराया गया तो तुम्हारी बात से यह सिद्ध होता है कि सनातन धर्मी लोग लालची थे। पैसा देखते ही लार टपकने लगी और फटाफट धर्म परिवर्तन करने लगे।

अगर तुम कहते हो कि गुमराह करके मुसलमान बनाया गया, तो तुम यह सिद्ध कर रहे हो कि सनातन धर्मी लोग जाहिल या मोटी बुद्धि के थे, उन्हें आसानी से गुमराह किया जा सकता था। अगर ऐसा ही है तब तुम विश्वगुरू किस मामले में थे?

उपरोक्त लेख से प्रभावित होने वाले लोग अपने धर्म की बुराईयां खोजने की बजाय दूसरों के धर्म पर अँगुली उठा रहे हैं, यही तो साम्प्रदायिकता का पहला कदम है। इसी मकसद से उपरोक्त लेख लिखा गया है।

उक्त लेख में सवाल खड़ा किया गया है कि आखिर इस्लाम में ऐसी क्या समस्या है कि अधिकतर इस्लामिक देशों में अल्पसंख्यकों की दुर्दशा क्यों है ?

हम तुमसे पूछते हैं कि हिन्दू देश में गरीब हिन्दुओं की दुर्दशा क्यों है? क्यों अछूत, अन्त्यज, नीच कहे जा रहे हैं? इस्लामिक देशों में गरीब मुसलमानों की दुर्दशा क्यों है? क्रिश्चियन देशों में गरीब क्रिश्चियनों की दुर्दशा क्यों है? सभी धर्मों के शोषक वर्ग जाति-देश की सीमाओं से ऊपर उठकर लामबंद होकर दुनिया भर के मजदूरों, किसानों, बुनकरों के खिलाफ क्यों लड़ रहे हैं?

आज दुनिया की असल समस्या ये बनी हुई है कि तुम अमीर लोग हम गरीबों के रोजी-रोटी के सवालों को दबाने के लिए ऐसे झूठे आंकड़ों पर आधारित फालतू सवाल खड़े करते हो जिससे जनता तुम्हारे हमलों पर ध्यान न दें। और जनता अपनी तकलीफों को भूल कर तुम्हारे साम्प्रदायिक साजिशों में फँसकर बर्बाद हो रही है और तुम जनता का खून चूसकर, उनकी हड्डियां निचोड़कर मालामाल हो रहे हो।

Updated : 3 July 2022 7:04 AM GMT
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