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आज जस्टिस सैयद नुरूल होदा की पुण्यतिथी है. आप आज ही के दिन 7 जून 1935 को इस दुनिया को अलविदा कह गए थे.

Today is the death anniversary of Justice Syed Nurul Hoda. You said goodbye to this world on this very day, June 7, 1935.

आज जस्टिस सैयद नुरूल होदा की पुण्यतिथी है. आप आज ही के दिन 7 जून 1935 को इस दुनिया को अलविदा कह गए थे.
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7 जून यौमे वफात

जस्टिस सैयद नुरूल होदा

आपका जन्म 1 जनवरी, 1854 में पटना सिटी के लोदी कटरा मुहल्ले में ज़मीनदार मौलवी शमशुल होदा के घर हुई. कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से मास्टर व वकालत की डिग्री हासिल करने के बाद कलकत्ता हाई कोर्ट में प्रैक्टिस शुरू की. 1907 में जज नियुक्त हुए. बाद में सीआईआई व ओबीआई पद से भी सम्मानित हुए. इस दौरान वो अपनी क़ौम में फैली अशिक्षा से रूबरू हुए और फ़ैसला किया कि वो इसे दूर करने की कोशिश करेंगे. उन्होंने अपनी अरबों की सम्पत्ति एक तालीमी गहवारे के नाम कर दी. उस गहवारे का नाम 'मदरसा शमशुल होदा' है.


पटना का हर शख़्स 'मदरसा शमशुल होदा' ज़रूर जानता होगा, लेकिन क्या आप इसके निर्माण करवाने वाले शख़्स से भी रूबरू हैं? ज़्यादातर लोग शायद इसके संस्थापक से बख़ूबी वाक़िफ़ होंगे, लेकिन कई लोग शायद इन्हें जानते भी न हों…

इस ऐतिहासिक मदरसे व इसी कैम्पस में स्थित प्रसिद्ध नूरी मस्जिद की बुनियाद नवम्बर, 1912 ई. में ही पड़ी. इस मस्जिद व मदरसे के निर्माता जस्टिस सैयद नुरूल होदा थे. आपका जन्म 1 जनवरी, 1854 में पटना सिटी के लोदी कटरा मुहल्ले में ज़मीनदार मौलवी शमशुल होदा के घर हुई. कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से मास्टर और वकालत की डिग्री हासिल करने के बाद कलकत्ता हाई कोर्ट में प्रैक्टिस शुरू की. 1907 में जज नियुक्त हुए. अंग्रेज़ी सरकार ने सी.आई.आई. और ओ.बी.आई. के पद से भी सम्मानित किया. 1916 में घर की मुहब्बत पटना हाई कोर्ट खींच लाई. यहां वो अपनी क़ौम में फैली अशिक्षा से रूबरू हुए और तब ही फ़ैसला किया कि वो इसे दूर करने की कोशिश ज़रूर करेंगे. बस फिर क्या था. अपने अरबों की सम्पत्ति इस तालीमी गहवारे के नाम कर दी. उस ज़माने में बच्चों को पढ़ने, रहने व खाने पर हर महीने 15 हज़ार रूपये का खर्च आता था, जिसे कुछ दिनों तक यही वहन करते रहें. फिर उन्होंने तत्कालीन शिक्षा मंत्री सैयग फ़खरूद्दीन से विचार-विमर्श कर इस मदरसे की सम्पत्ति सरकार के अधीन कर दिया, ताकि सरकारी नियंत्रण में इसका वजूद क़ायम रहे और सुचारू रूप से चलता रहे.

जस्टिस सैयद नुरूल होदा आज ही के दिन 7 जून 1935 को इस दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह कर चले गए.

नोट : जस्टिस सैयद नुरूल होदा पटना यूनिवर्सिटीके संस्थापक भी हैं, इन्ही कोशिश की वजह कर इनके खोले मदरसे के सामने 1917 में पटना यूनिवर्सिटी स्थापित हुई।


संदर्भ- LostMuslimHeritageOf

Bihar

लेखक Afroz Alam Sahil

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संकलन अताउल्ला खा पठाण सर टू नकी बुलढाणा महाराष्ट्र

Updated : 7 Jun 2021 5:23 PM GMT
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