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आजादी_का_अमृत_महोत्सव ! 'कांग्रेस के कैश बैग' के तौर पर मशहूर थे हाजी उस्मान सेठ

Independence_Ka_Amrit_Festival! Haji Usman Seth was popularly known as 'Cash Bag of Congress'

आजादी_का_अमृत_महोत्सव ! कांग्रेस के कैश बैग के तौर पर मशहूर थे हाजी उस्मान सेठ
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#आजादी_का_अमृत_महोत्सव

*'कांग्रेस के कैश बैग' के तौर पर मशहूर थे हाजी उस्मान सेठ*➡️करोडो की संपत्ती दान तो की ही थी,वक्त आने पर बेटे को गिरवी रख कर की थी मदद

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आजादी के आंदोलन में खुले हाथ से दान करने वाले हाजी उस्मान सेठ 'कांग्रेस के कैश बैग' के तौर पर मशहूर थे। उनका जन्म 1887 में बेंगलौर के एक रईस व्यापारी परिवार में हुआ था। यहां आकर बसने से पहले उनके पिता का कच्छ में कपड़ों का कारोबार था। 1919 में उस्मान सेठ खिलाफत आंदोलन में शामिल हुए। जब वे अली ब्रदर्स और महात्मा गांधी के संपर्क में आए तो उन्होंने इस आंदोलन में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। 1920 के आंदोलन में जब

फंड की कमी हुई तो महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू और अली ब्रदर्स उनके पास मदद के लिए गए। उन्होंने गांधी-नेहरू को एक ब्लैंक चेक और चमड़े की थैलियों में सोने के सिक्के दिए। वे हमेशा ब्लैंक चेक देकर ही पार्टी की मदद किया करते थे। इसी वजह से वह 'कांग्रेस के कैश बैग के तौर पर मशहूर हुए। उस्मान सेठ ने 27 आलीशान बंगलों को बेचकर मिली रकम गांधीजी को दान की थी। वह 15 साल तक मैसूर स्टेट कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रहे। तीन आंदोलनों में जेल भी गए। इससे नाराज अंग्रेजों ने उनके बिजनेस का बहिष्कार करना शुरू कर दिया। नतीजतन उस्मान सेठ को संपत्तियां बेचनी और गिरवी रखनी पड़ी। 1930 में जब कांग्रेस को फंड की जरूरत पड़ी और नेहरू ने मदद मांगी तब उन्होंने तंगहाली की फिक्र नहीं की। बड़े बेटे इब्राहिम को नीलाम करके पार्टी की जरूरत पूरी की। उस्मान सेठ ने 1932 में अंतिम सांस ली। आजादी के बाद 1949 में नेहरू ने उस्मान सेठ के परिवार को 300 एकड़ जमीन देने की पेशकश की, लेकिन परिवार ने लेने से इनकार कर दिया था। तब नेहरूजी ने इब्राहिम साहेब को सार्वजनिक रूप से सम्मानित किया था।

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दैनिक भास्कर दि 12 आगष्ट 22

जबलपूर

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संकलन अताउल्लाखा पठाण सर

टूनकी,बुलढाणा

Updated : 14 Aug 2022 12:03 PM GMT
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