Home > About Us... > जिनके दौर में बिहार ने शिक्षा के फ़ील्ड में सबसे अधिक तरक़्क़ी की।

जिनके दौर में बिहार ने शिक्षा के फ़ील्ड में सबसे अधिक तरक़्क़ी की।

During which Bihar made the most progress in the field of education.

जिनके दौर में बिहार ने शिक्षा के फ़ील्ड में सबसे अधिक तरक़्क़ी की।
X

जाकीर हुसैन- 9421302699


मोंटेगू-चेम्सफ़ोर्ड सुधार के तहत भारत में ब्रिटिश सरकार द्वार धीरे-धीरे भारत को स्वराज्य संस्थान का दर्ज़ा देने की शुरुआत की गई। इसके बाद केंद्र और राज्य में हुकूमत को तक़सीम कर दिया गया।

इसके कारण प्रांतों में दोहरे शासन की व्यवस्था आरंभ हुई। इसके तहत कुछ लोगों को मंत्रालय मिली! 1921 में मधुसूदन दास और मोहम्मद फ़ख़रुद्दीन को अलग अलग पॉर्ट्फ़ोलीओ की मिनिस्टरी मिलती है।

जनवरी 1921 से 9 मार्च 1923 तक मधुसूदन दास मिनिस्टर रहते हैं, उनके इस्तीफ़ा के बाद 9 मार्च 1923 को ही गणेश दत्त उनकी जगह लेते हैं, और dyarchy के ख़त्म होने तक मिनिस्टर रहे।

जनवरी 1921 से 6 मई 1933 तक मोहम्मद फ़ख़रुद्दीन मिनिस्टर रहते हैं। और उनके इंतक़ाल के बाद 6 मई 1933 से 24 दिसम्बर 1933 तक मुहम्मद हुस्सैन मिनिस्टर रहते हैं, और 15 जनवरी 1934 से dyarchy के ख़त्म होने तक अब्दुल अज़ीज़ मिनिस्टर रहे।

क्यूँकि 1935 में ब्रिटिश पार्लियामेंट ने 'गवर्नमेंट ऑफ़ इंडिया एक्ट' पारित किया था। इस एक्ट के तहत 1937 में भारत में प्रांत स्तर पर चुनाव हुए। बिहार आज़ाद मुस्लिम पार्टी के नेता बैरिस्टर यूनुस ने 1 अप्रैल 1937 को हुकूमत क़ायम की। ख़ुद प्रधानमंत्री बने, और वहाब ख़ान को राजस्व मंत्री, अजित प्रसाद सिंह देव को स्थानीय स्वशासन मंत्री और गुरु सहाय लाल को नदी विकास मंत्री बनाया।

कुछ दिन सरकार चलने के बाद ये सरकार गिर जाती है, और कांग्रेस के श्रीकृष्ण सिंह ने 20 जुलाई 1937 को हुकूमत क़ायम की और ये हुकूमत 31 अक्तूबर 1939 तक क़ायम रही। इस सरकार में शिक्षा मंत्री सैयद महमूद रहे।

यहाँ शिक्षा मंत्री ज़िक्र इस लिए कर रहे क्यूँकि नीचे जो तस्वीर अटैच किया है, वो मोहम्मद फ़ख़रुद्दीन, मुहम्मद हुस्सैन, अब्दुल अज़ीज़ और सैयद महमूद की है, और सारे लोग 1921 से 1938 के दरमियान बिहार के शिक्षा मंत्री रहे हैं, जिनके दौर में बिहार ने शिक्षा के फ़ील्ड में सबसे अधिक तरक़्क़ी की। पटना मेडिकल कॉलेज, बिहार एंजिनीरिंग कॉलेज, साइंस कॉलेज, मदरसा बोर्ड, आयुर्वेदा कॉलेज, तिब्बी कॉलेज जैसे संस्थान वजूद में आए। लंगट सिंह कॉलेज से लेकर पटना ट्रेनिंग कॉलेज, पटना यूनिवर्सिटी से लेकर बीएन कॉलेज को फ़रोग़ देने में इन लोगों का जो योगदान है उसे कोई फ़रामोश नही कर सकता है।


Source heritage times

Md Umar Ashraf

◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆

संकलन अताउल्ला खा पठाण सर टू नकी बुलढाणा महाराष्ट्र

Updated : 29 Jun 2021 7:40 AM GMT
Tags:    
Next Story
Share it
Top