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18 आगस्ट यौमे शहादत - नेताजी' सुभाष चन्द्र बोस ने अपनी ज़िन्दगी के आख़री पांच सालो (1941 - 45) मे तीन बड़े सफ़र किये हैं...

August 18 Yaume Shahadat - Netaji 'Subhash Chandra Bose has made three big journeys in the last five years of his life (1941-45) ...

18 आगस्ट यौमे शहादत -  नेताजी सुभाष चन्द्र बोस ने अपनी ज़िन्दगी के आख़री पांच सालो (1941 - 45) मे तीन बड़े सफ़र किये हैं...
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जाकीर हुसैन - 9421302699


➡ पहला सफ़र 1941 को मुहम्मद ज़ियाउद्दीन बन कर कोलकात से काबुल के लिए किया....

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16 जनवरी 1941 कोे सुभाष बाबु पुलिस को चकमा देते हुए एक पठान मोहम्मद ज़ियाउद्दीन के वेश में अपने घर से निकलते हैं जो एक बीमा एजेंट है। रात एक बज कर पैंतीस मिनट पर 38/2, एलगिन रोड, कोलकाता पर एक जर्मन वांडरर कार आ कर रुकी. कार का नंबर था बीएलए 7169. लंबी शेरवानी, ढीली सलवार और सोने की कमानी वाला चश्मा पहने बीमा एजेंट मोहम्मद ज़ियाउद्दीन ने कार का पिछला दरवाज़ा खोला. ड्राइवर की सीट पर उनके भतीजे शिशिर बोस बैठे हुए थे.

सुभाष बाबु ने जानबूझ कर अपने कमरे की लाइट बंद नहीं की. चंद घंटों में ही वो गहरी नींद में सोए कोलकाता की सरहद पार कर चंदरनागोर की तरफ़ बढ़ निकले.

वहाँ भी उन्होंने अपनी कार नहीं रोकी.

शिशिर बाबु ने उन्हे अपनी गाड़ी से कोलकाता से दूर धनबाद के पास गोमो स्टेशन तक पहुँचाया। गोमोह रेलवे स्टेशन पर कोलकाता की तरफ़ से दिल्ली कालका मेल आती दिखाई दी. वो पहले दिल्ली उतरे.

फिर वहां से फ्रण्टियर मेल पकड़कर वे पेशावर पहुँचे। पेशावर में उनका इंतज़ार फॉरवर्ड ब्लॉक के ही मियाँ अकबर शाह कर रहे थे। मियाँ अकबर शाह ने उनकी मेहमान नवाज़ी अपने सबसे क़रीबी दोस्त अबद ख़ान के घर पर की और फिर वहीं उनकी मुलाक़ात मोहम्मद शाह, और किर्ती किसान पार्टी के भगतराम तलवार से करा दी। 26 जनवरी 1941 को भगतराम तलवार के साथ सुभाष बाबु पेशावर से अफ़गानिस्तान की राजधानी काबुल की ओर निकल पड़े। इस सफ़र में भगतराम तलवार रहमत ख़ान नाम के पठान और सुभाष बाबु उनके गूँगे-बहरे चाचा बने थे। पहाड़ियों में पैदल चलते हुए उन्होंने यह सफ़र पूरा किया और आग़ा ख़ान के मुरीदों की मदद से सरहद पार कर काबुल पहुंचे.. काबुल में सुभाष बाबु उत्तमचन्द मल्होत्रा नाम के एक हिन्दुस्तानी ताजिर (व्यापारी) के यहां रहे... रूसी सिफ़ारतख़ाना (दूतावास) मे पनाह नही मिलने के वजह कर उन्होने जर्मन और इटालियन सिफ़ारतख़ानो का दौरा किया और इटालियन सिफ़ारतख़ाने में उनकी कोशिश कामयाब रही। जर्मन और इटालियन ने मिलकर उनकी मदद की। आखिर में आरलैण्डो मैजोन्टा नाम के इटालियन बनकर सुभाष बाबु काबुल से निकलकर रूस की राजधानी मास्को होते हुए जर्मनी की राजधानी बर्लिन पहुँच गए।

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➡ *दुसरा सफ़र सुभाष बाबु ने 1943 मे आबिद हसन साफ़रानी के साथ जर्मनी से सुमात्रा के लिए पंडुब्बी के ज़रिये तय किया ..*.

हिटलर से मुलाक़ात के बाद 8 फ़रवरी 1943 को जर्मनी के कील बन्दरगाह में वे अपने साथी आबिद हसन सफ़रानी के साथ एक जर्मन पनडुब्बी (U-180) में सवार हो कर पूर्वी एशिया की ओर निकल गये। वह जर्मन पनडुब्बी (U-180) उन्हें हिन्द महासागर में मैडागास्कर के किनारे तक लेकर गयी। वहाँ से वे दोनों 21 अप्रील 1943 को पास मे ही खड़ी जापानी पनडुब्बी (I-29) तक राफ़्ट के ज़रिया पहुँचे। दुसरी जंग ए अज़ीम (द्वितीय विश्वयुद्ध) के दौरान किसी भी दो मुल्कों की नौसेनाओं की पनडुब्बियों के ज़रिया अवाम (नागरिकों) की यह एकलौती अदला-बदली हुई थी। यह जापानी पनडुब्बी (I-29) उन्हें सुमात्रा (इंडोनेशिया) के पेनांग बन्दरगाह तक पहुँचाकर आयी। फिर वहाँ से सुभाष बाबु आबिद हसन के साथ 16 मई 1943 को जापान की राजधानी टोक्यो पहुँचे।

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➡ बोस ने अपना तीसरा और आख़री सफ़र 17 अगस्त 1945 को कर्नल राजा हबीब उर रहमान के साथ सिंगापुर से शुरु किया ... इसके बाद उनके साथ क्या हुआ नही पता ...

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*कहा जाता है 18 अगस्त 1945 को सुभाष बोस का विमान ईंधन लेने के लिए ताइपे हवाई अड्डे पर रुका था..*

दोबारा उड़ान भरते ही एक ज़ोर की आवाज़ सुनाई दी थी. बोस के साथ चल रहे उनके साथी कर्नल हबीब उर रहमान को लगा था कि कहीं दुश्मन की विमानभेदी तोप का गोला तो उनके विमान को नहीं लगा है.

बाद में पता चला था कि विमान के इंजन का एक प्रोपेलर टूट गया था. विमान नाक के बल ज़मीन से आ टकराया था और हबीब की आंखों के सामने अंधेरा छा गया था.

जब उन्हें होश आया तो उन्होंने देखा कि विमान के पीछे का बाहर निकलने का रास्ता सामान से पूरी तरह रुका हुआ है और आगे के हिस्से में आग लगी हुई है. हबीब ने सुभाष बाबु को आवाज़ दी थी, "आगे से निकलिए नेताजी."

बाद में हबीब ने याद किया था कि जब विमान गिरा था तो नेताजी की ख़ाकी वर्दी पेट्रोल से सराबोर हो गई थी. जब उन्होंने आग से घिरे दरवाज़े से निकलने की कोशिश की तो उनके शरीर में आग लग गई थी. आग बुझाने के प्रयास में हबीब के हाथ भी बुरी तरह जल गए थे.

उन दोनों को अस्पताल ले जाया गया था. अगले छह घंटों तक नेता जी को कभी होश आता तो कभी वो बेहोशी में चले जाते. उसी हालत में उन्होंने आबिद हसन को आवाज़ दी थी.

"आबिद नहीं है साहब, मैं हूँ हबीब." उन्होंने लड़खड़ाती आवाज़ में हबीब से कहा था कि उनका अंत आ रहा है. हिन्दुस्तान जा कर लोगों से कहो कि आज़ादी की लड़ाई जारी रखें. हिन्दुस्तान जरुर आज़ाद होगा उसे कोई गुलाम बनाये नही रख सकता।

उसी रात लगभग नौ बजे नेता जी ने अंतिम सांस ली थी. 20 अगस्त को नेता जी का अंतिम संस्कार किया गया. अंतिम संस्कार के पच्चीस दिन बाद हबीबुररहमान नेता जी की अस्थियों को लेकर जापान पहुंचे.

1945 में ब्रिटिश सरकार ने नेताजी का पता लगाने के लिए एक जाँच दल भी बनाया जिसे ये आदेश देकर भेजा गया की अगर बोस जिन्दा मिल जाये तो उन्हें गिरफ्तार करके लाया जाये पर जाँच दल सिर्फ हादसे की खबर लेकर ही वापस लौटा और तबसे लेकर आज तक नेताजी के जिन्दा होने या मर जाने की खबर दुनिया के लिए पहेली बनी हुयी है ।।

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Source -heritage times

Md Umar Ashraf

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Others sources-

https://en.m.wikipedia.org/wiki/Netaji_Subhas_Chandra_Bose:_The_Forgotten_Hero

https://en.m.wikipedia.org/wiki/Subhas_Chandra_Bose

https://en.m.wikipedia.org/wiki/Abid_Hasan

https://en.m.wikipedia.org/wiki/Raja_Habib_ur_Rahman_Khan

https://en.m.wikipedia.org/wiki/German_submarine_U-180

https://en.m.wikipedia.org/wiki/Japanese_submarine_I-29

https://en.m.wikipedia.org/wiki/Death_of_Subhas_Chandra_Bose

http://m.hindustantimes.com/kolkata/car-that-aided-netaji-s-great-escape-unveiled-after-restoration/story-BNbJ5kbq6SMdUjYXD2ZR3M.html

http://m.timesofindia.com/city/kolkata/netaji-subhas-chandra-boses-great-escape-limo-to-zoom-again/articleshow/56612114.cms

http://www.cartoq.com/netaji-subashchandra-boses-wanderer-the-great-escape-car-to-be-restored-by-audi/

http://narendralutherarchives.blogspot.in/2006/12/jai-hind-safrani.html?m=1

https://scroll.in/article/806493/how-netaji-boses-aide-coined-the-slogan-jai-hind-in-a-german-pow-camp

http://www.thebetterindia.com/83132/subhash-chandra-bose-india-submarine-germany-japan/

http://www.bbc.com/hindi/india/2015/04/150418_subhash_chandra_bose_controversy_vr

https://hubpages.com/education/The-Submarine-Adventure-of-Subhash-Chandra-Bose

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संकलन अताउल्ला खा रफिक खा पठाण सर टूनकी तालुका संग्रामपुर बुलढाणा महाराष्ट्र

9423338726

Updated : 18 Aug 2021 5:44 AM GMT
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