Home > About Us... > 2 आगष्ट पुण्यतिथी ! जमियत ए उलेमा के प्लॅटफॉर्म से आजादी की मशाल रौशन करने वाले स्वतंत्रता सेनानी मौलाना हिफ़ज़ुर्रहमान सिवहारवी (र.अ.)

2 आगष्ट पुण्यतिथी ! जमियत ए उलेमा के प्लॅटफॉर्म से आजादी की मशाल रौशन करने वाले स्वतंत्रता सेनानी मौलाना हिफ़ज़ुर्रहमान सिवहारवी (र.अ.)

2 August death anniversary! Maulana Hifzur Rahman Sivaravi (R.A.), freedom fighter who lighted the torch of freedom from the platform of Jamiat-e-Ulema

2 आगष्ट पुण्यतिथी ! जमियत ए उलेमा के प्लॅटफॉर्म से आजादी की मशाल रौशन करने वाले स्वतंत्रता सेनानी मौलाना हिफ़ज़ुर्रहमान सिवहारवी (र.अ.)
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आजादी_का_अमृत_महोत्सव


उन्होंने एक चौथाई शताब्दी 1922-1947 तक ब्रिटिश शासन के खिलाफ लड़ाई लड़ी और आठ साल जेल में बिताइ।

आजादी के बाद के भारत में मौलाना स्योहारवी रहमतूल्लाह अलयही ने भारत में मुसलमानों के लिए एक रोड मैप बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी संविधान सभा के सदस्य के रूप में उन्होंने भारत के संविधान में मुसलमानों के लिए एक उचित स्थान का दावा करने में अपनी भूमिका निभा कर देश को एक धर्मनिरपेक्ष बना दिया और इस तरह देश में मुस्लिम समुदाय को एक सम्मानजनक दर्जा दिलाया

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10 जनवरी सन् 1901 को सिवहारा (बिजनौर) के बाहैसियत सिद्दीकी खानदान में पैदा हुए मौलाना हिफजुर्रहमान (र.अ.)का घरेलू नाम मुनीरुद्दीन था मगर आप अपने तवारीखी नाम हिफ्जुर्रहमान से मशहूर हुए। शुरुआती तालीम घर से लेकर मदरसा फैज़े आम(स्योहारा) से तालीम हासिल करके आप देवबंद पहुंचे, जहां अल्लामा अनवर शाह कश्मीरी(र.अ.)से दीन दुनियात की आला तालीम हासिलकर आपने कई मदरसों में पढ़ाने का काम किया। लेकिन मौलाना को मिल्लतो-कौम को साथ लेकर मुल्क को गुलामी से आज़ाद कराने का ऐसा ज़ज्बा था कि आपने सियासत में कदम रखा और इस राह से मुल्को मिल्लत और मुल्क की आज़ादी के लिए दिलो जान से लग गये।मौलाना ने अपनी सियासी ज़िंदगी का आगाज़ ख़िलाफत मूवमेंट से किया मगर बाद में जमियत उलेमा ए हिन्द के प्लेटफार्म से अपनी ज़िंदगी मुल्क व मिल्लत के लिए वक्फ़ कर दी। आप सन् 1942 से जब तक ज़िंदा रहे, जमियत के सदर के ओहदे पर कायम रहे।

1934-35 ई0 में मौलाना उत्तर प्रदेश सूबाई कांग्रेस के मेम्बर बने और आख़िर तक आप यूपी से ही आल इंडिया कांग्रेस वर्किंग कमेटी के रुक्न मुंतखब होते रहे। अकाबीरीन उलेमाए देवबंद का

यही वह अज़ीम सेकुलर जमहूरी नज़रिया था जिस पर अमल करते हूए मुजाहिदे मिल्लत मौलाना हिफ़्जुर्रहमान ने कांग्रेस के साथ ख़ुद को वाबस्ता किये रखा और शुरू से आखिर तक मुस्लिम लीग और जिनाह की दो कौमी सियासत की मुखालिफ़त की। उन्होंने 1920 ई०से 1947 ई0 तक छः बार और आठ बरस कैद बंद की सऊबतें बर्दाश्त कीं।

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जमीअत उलेमाए हिंद के नाज़िमे उमूमी की हैसियत से आपने अख़बार अलजमीअत को मुल्क का बेहतरीन रोज़नामा बनादिया।

अलजमीअत प्रेस, लाइब्रेरी और इशाअते कुतुब का शानदार इदारा कायम किया। आप ही की कोशिश से हिंदुस्तानी मुसलमानों का पहला अंग्रेज़ी अखबार 'मैसेज वीकली' 1951 ई० में शाए होना शरू हुआ था, जिसके एडीटर सय्यद औसाफ़ अली थे। मुजाहिदे मिल्लत की इन मसाईए जमीला का एतिराफ़ शैखुल इस्लाम हज़रत मौलाना हुसैन अहमद मदनी साहब रह0 ने बड़ी मुहब्बत से किया है।"बहैसियत एक मुक्तदिर कांग्रेसी रहनुमा वह अवाम खवास में

महबूब व मोहतरम रहे । उनकी सेकुलर और फ़राख दिल शखशीयत हिंदुओं और मुसलमानों में यक्सां मकबूल रही । उन्होंने बिला तफरीक

मजहब-मिल्लत बंदगाने खुदा की ख़िदमत अंजाम दी। नए भारत की तामीर में वह पंडित जवाहर लाल नेहरू के तरक्की पसंद अज़ाइम और मसाई के हामी और मददगार थे।

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आपने सन् 1947 के सैलाब के वक्त या आज़ादी के बाद दिल्ली के फिरकावाराना फसाद के वक्त जिस जवांमदी से कौमो-मिल्लत की मदद की, उसके बारे में कुछ भी लिखना आपकी शख्सियत के मुकाबले कम ही होगा। आप बहुत बड़े मुसन्निफ् भी रहे। आप की लिखी किताब इस्लाम का एकतसादी निजाम और अख़लाक व फलसफये एख़लाक बहुत मशहूर हुई।

आखिरकार 2 अगस्त 1962 की सुबह साढे़ तीन बजे के करीब मौलाना हिफ्जुर्रहमान रहमतूल्लाह अलयही जिन्होने देश में तमाम मोर्चे जीते थे। मौत के फरिश्ते के हाथों जिन्दगी का मोर्चा हार गए और *उन्हें लगभग दो लाख इंसानों के बेहाल व अश्कबार हजूम ने कब्रिस्तान पहुंचाया गया* आज जो भी है

आप जैसे बुजूरगो की कुर्बानियो का नतीजा है

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संदर्भ- 2)फखरे वतन

-- फारूक अर्गली

2)लहू बोलता भी है

-- सय्यद शहानवाज अहमद कादरी कृष्ण कल्की

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संकलन तथा अनुवादक लेखक *अताउल्ला खा रफिक खा पठाण सर टूनकी तालुका संग्रामपूर जिल्हा बुलढाणा महाराष्ट्र*

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Updated : 2 Aug 2022 9:22 AM GMT
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