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बिहार के सबसे पहले मुख्यमंत्री मोहम्मद युनुस साहेब ने 1 अप्रैल 1937 को बिहार मे अपनी सरकार बनाई थी,

बिहार के सबसे पहले मुख्यमंत्री मोहम्मद युनुस साहेब ने 1 अप्रैल 1937 को बिहार मे अपनी सरकार बनाई थी,
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1 अप्रील 🕛

मोहम्मद युनुस साहेब ने 1 अप्रैल 1937 को बिहार मे अपनी सरकार बनाई थी, और इस तरह लोकतांत्रिक तरीक़े से चुने गए बिहार के सबसे पहले मुख्यमंत्री थे। उनकी सरकार ना सिर्फ़ बिहार बल्के पुरे भारतीय उपमहाद्विप मे लोकतांत्रिक तरीक़े से चुनी हुई पहली सरकार थी। उनकी पार्टी का नाम मुस्लिम इंडिपेंडेंट पार्टी था; जिसे इमारत ए शरिया बिहार के बानी अमीर ए शरियत हज़रत मौलाना अबुल मुहासिन मुहम्मद सज्जाद साहेब( र.अ.) ने बनाई थी।

1935 में ब्रिटिश पार्लियामेंट ने 'गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट' पारित किया था. एक्ट में प्रधानमंत्री का पदनाम प्रांतीय सरकार के प्रधान के लिए था लेकिन व्यवहार में वो पद वही था जो आज मुख्यमंत्री का है. उस वक़्त मोहम्मद यूनुस साहेब बिहार के पहले प्रधानमंत्री बने थे।

स्वतंत्रता प्राप्ति के मामले में युनूस साहेब और मौलाना अबुल मुहासिन मुहम्मद सज्जाद साहेब (र.अ.) शुरू से ही कांग्रेस के साथ जुड़े हुए थे लेकिन जब कांग्रेस सबों को साथ लेकर चलने में विफ़ल हुई तो 1937 में होने वाले विधानसभा चुनाव में बैरिस्टर मोहम्मद यूनुस साहेब और मौलाना मुहम्मद सज्जाद साहेब (र.अ.) ने ' मुस्लिम इंडीपेंडेंट पार्टी ' की स्थापना की, जिसका मक़सद मुस्लिम लीग और कांग्रेस की सियासत से अलग हट कर काम करना था।

1937 में राज्य चुनाव में 152 के सदन में 40 सीटें मुस्लिमों के लिए आरक्षित थीं जिनमें 20 सीटों पर 'मुस्लिम इंडीपेंडेंट पार्टी' और पांच सीटों पर कांग्रेस ने जीत हासिल की।

शुरू में कांग्रेस पार्टी ने मंत्रिमंडल के गठन से इंकार कर दिया तो राज्यपाल ने दूसरी सबसे बड़ी पार्टी के नेता के रूप में बैरिस्टर मो. यूनुस साहेब को प्रधानमंत्री (प्रीमियर) पद का शपथ दिलाया।

लेकिन चार महीने बाद जब कांग्रेस मंत्रिमंडल के गठन पर सहमत हो गई तो यूनुस साहेब ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया।

तब से लेकर अपनी मौत के वक़्त तक यूनुस अपने सिद्धांत पर अडिग रहे और राष्ट्रीय एकजुटता व देश की आज़ादी के सवाल पर हमेशा कांग्रेस का साथ देते रहे।

मोहम्मद यूनुस साहेब की पूरी ज़िन्दगी किसानों, दलितों व मुसलमानों के उन्नति व प्रगति व बिहार के विकास के इर्द-गिर्द घूमती रही, जो उनकी चुनावी राजनीति का भी मुख्य एजेंडा था.

मगर ये एजेंडा उनकी ज़िन्दगी में बदलाव लाने को लेकर था न कि उन्हें वोट की फ़सल की तरह इस्तेमाल करके काट कर फेंक देने का था.

'यूनुस साहेब की चार महीने की सरकार में किसानों के लिए कई क़दम उठाए गए थे।

फ़ोटो मे आप #1stCMofBihar मोहम्मद युनुस और उनके मंत्रिमंडल को देख सकते हैं, जिनका बाढ़ के किसानो एवं आम जनता की ओर से बिर्जु मिल्की न बी° रामलखन सिंह के घर पर स्वागत किया जा रहा है। इस यादगार तस्वीर जिसमे आप पहली पंक्ति मे एल.एन सिंह (चेयरमैन एल.बी. बाढ़), कुमार ए.पी.एस. देव (मंत्री एल.सी.जी. बिहार), मोहम्मद युनुस (मुख्यमंत्री बिहार), गुर सहाय लाल (राजस्व मंत्री बिहार), पी.एन टंडन (ICS -SDO बाढ़), मौलवी एस. हसन (चेयरमैन डिस्ट्रिक्ट बोर्ड पटना), पी.डी. सिंह (वाईस चेयरमैन डिस्ट्रिक्ट बोर्ड पटना) को कुर्सी पर बाएं से दाएं बैठा देख सकते हैं.. उनके पीछे दासु सिंह (वकील, पटना), बी.सी सिंन्हा (वकील, पटना), ख़ानबहादुर युसुफ़ हसन ख़ां (मेजिसट्रेट, बाढ़) आर.एस.एल.सी. सुचाती (चेयरमैन एल.बी. बिहार शरीफ़), बी° रामलखन सिंह, पंडित बलभादेव मायने, एस.आई. पुलिस बाढ़ खड़े हैं; को देख सकते हैं।

Source heritage times

Mo umar ashraf

संकलन अताउल्ला पठाण सर टू नकी बुलढाणा महाराष्ट्र

Updated : 1 April 2021 3:37 PM GMT
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