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मीर अकबर अली खान खिलाफत और असहयोग आंदोलन मे सक्रिय योगदान

मीर अकबर अली खान खिलाफत और असहयोग आंदोलन मे सक्रिय योगदान
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स्वतंत्रता सेनानी➡️2️⃣3️⃣4️⃣

मीर अकबर अली खान➡️खिलाफत और असहयोग आंदोलन मे सक्रिय योगदान


मीर अकबर अली खान का जन्म 20 नवंबर, 1899 को हैदराबाद के एक धनी परिवार में हुवा था, जो वर्तमान में आंध्र प्रदेश की राजधानी है। उनके पिता का नाम मीर महबूब अली खान था। मीर अकबर ने अपनी प्राथमिक शिक्षा अपने मूल स्थान पर की थी। जब वे अलीगढ़ में पढ़ रहे थे, उन्होंने खिलाफत, असहयोग आंदोलन मे भाग लेने के लिए कॉलेज का बहिष्कार किया। उन्होंने सर अकबर हैदरी, सर रॉस मसूद, सहित निजाम के प्रतिनिधियों द्वारा बहिष्कार का विरोध करने के अनुरोध को अस्वीकार कर दिया।

उन्होने लतीफ यार जंग, हबीब उर रहमान शेरवानी आदि के साथ राष्ट्रीय आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। बाद में, वह जामिया मिलिया इस्लामिया में शामिल हो गए, जहाँ उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा पूरी की।उन्होंने लंदन जाकर लॉ की डिग्री प्राप्त की। उन्होंने 1927 को हैदराबाद लौटकर प्रॅक्टिस शुरू कि। उन्होंने कभी भी आय को प्राथमिकता नहीं दी, बल्की मानवीय दृष्टिकोण के साथ काम किया। उन्होंने लोगों को मूलभूत सुविधाओं में सुधार के लिए कई स्वैच्छिक संगठन शुरू किए।वह हिंदुओं और मुसलमानों के बीच सामंजस्य चाहते थे और अपने जीवन के लिए इसके माध्यम से उन्होने काम किया। 1929 में उन्होंने सांप्रदायिक खतम करणे और सदभावना कायम करने के लिये सोसाइटी ऑफ यूनियन एंड प्रोग्रेस की शुरुआत की।

उन्होंने हिंदुओं और मुसलमानों के बीच विवादों को दूर करने के लिए श्रीनिवास अयंगर के साथ एक विशेष कार्यक्रम तैयार किया।। 1940 में उन्होंने मजलिस-ए-इल्तहादुल मुसलीमीन में शामिल होने की मोहम्मद अली ज़िन्ना की सलाह को अस्वीकार कर दिया।। बाद में उन्होंने 1946 में ख़ासिम रिज़वी द्वारा की गई पेशकश को भी ठुकरा दिया, जिसने उन्हें हैदराबाद के प्रधानमंत्री बनने के लिए कहा था।। वह 1949 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हुए। उन्हें अप्रैल, 1956 में

राज्यसभा के सदस्य के रूप में चुना गया। वे 18 साल की अवधि के लिए उस पद पर बने रहे।

बाद में (1972-74 ) भारत के उत्तर प्रदेश के राज्यपाल के रूप में उन्हें सरकार द्वारा नियुक्त किया गया था। एक बार फिर उन्हें 1974 में राज्यपाल के रूप में उड़ीसा भेजा गया था। वह 1976 तक उस पद पर थे। 1965 में उन्हें भारत सरकार ने पद्मभूषण से सम्मानित किया। मीर अकबर अली खान, जिन्होंने खुद को अपने जीवन के माध्यम से लोगों की सेवा में सारा जीवन समर्पित कर दिया था,।ऐसे महान स्वतंत्रता सेनानी की 1994 में मृत्यु हो गई।


संदर्भ- 1)THE IMMORTALS

लेखक syed naseer ahmed

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संकलन तथा अनुवादक लेखक अताउल्ला खा रफिक खा पठाण सर टूनकी तालुका संग्रामपूर जिल्हा बुलढाणा महाराष्ट्र

9423338726

Updated : 1 April 2021 5:08 AM GMT
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