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नेताजी के राष्ट्रीय सेना के कमांडर स्वतंत्रता सेनानी कर्नल बुरहानुद्दीन चित्राल

नेताजी के राष्ट्रीय सेना के कमांडर स्वतंत्रता सेनानी कर्नल बुरहानुद्दीन चित्राल
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स्वतंत्रता सेनानी➡️233

नेताजी के राष्ट्रीय सेना के कमांडर स्वतंत्रता सेनानी कर्नल बुरहानुद्दीन चित्राल,


कर्नल बुरहानुद्दीन चित्राल

जिन्होंने भारतीय राष्ट्रीय सेना

में एक कमांडर के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. 1915 में खैबर के चित्राल गांव में (अब पाकिस्तान) पख़्तून-ख़वा क्षेत्र मे जन्म हुवा था। वह प्रसिद्ध चित्राल रॉयल फैमिली से थे। उनके पिता शुजा-उल-मुल्क चित्राल के

शासक थे । इस्लामिया में पढ़ाई पूरी करने के बाद 1932 में देहरादून में बुरहानुद्दीन साहेब ने भारतीय सैन्य अकादमी में शामिल हो गए।

उन्होंने ब्रिटिश भारतीय सेना में 2/10 बलूच रेजिमेंट के कप्तान के रूप में कार्यभार संभाला। वह सेना अधिकारी के रूप में द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान मलाया में युद्ध के मैदान में गए थे। । जब युद्ध के शुरुआती दिनों में बर्मा और मलाया में ब्रिटिश सेनाओं को जापान की सेना ने हराया था, तो सैनिकों और अधिकारियों ने ब्रिटिश भारतीय सेना को युद्ध बंदियों के रूप में जापान द्वारा हिरासत में लिया गया था। कैप्टन बुरहानुद्दीन चित्राल भी युद्ध बंदियों में से एक थे। बाद में वह कैप्टन मोहन सिंह द्वारा गठित भारतीय राष्ट्रीय सेना में शामिल हो गए और बाद में नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने उनका पुनर्गठन और नेतृत्व किया। कप्तान बुरहानुद्दीन को विशेष छापामार रेजिमेंट में बहादुर समूह के कमांडर के रूप में नियुक्त किया गया था। उस अवधि के दौरान, बुरहानुद्दीन के भाई मुता-उल-मुल्क भी भारतीय राष्ट्रीय सेना में शामिल हुए और एक अधिकारी के रूप में अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया। दोनों भाइयों ने अपनी ज़िम्मेदारियों का कुशलता से निर्वहन किया। जब 3 मई, 1945 को रंगून पर कब्जा किया गया था तब ब्रिटिश सेना ने भारतीय राष्ट्रीय सेना के अधिकारियों और सैनिकों को हिरासत में ले लिया। कर्नल बुरहानुद्दीन भी उनमें से एक था। उन्हें कई आरोपों पर सैन्य अदालत में मुकदमे का सामना करना पड़ा। ऑल इंडिया मुस्लिम लीग ने बुरहानुद्दीन की ओर से कानूनी लड़ाई लड़ी जो अंग्रेजों द्वारा गिरफ्तार किए गए छह कमांडरों में से एक थे।उन्हें सात साल की सजा सुनाई गई थी। लेकिन, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और ऑल इंडिया मुस्लिम लीग द्वारा बड़े पैमाने पर आंदोलन के परिणामस्वरूप उस पर सजा रद्द कर दी गई। देश विभाजन के बाद भौगोलिक परिस्थिती के कारण बुरहानुद्दीन अपने मूल स्थान चित्राल में बस गये। कर्नल बुरहानुद्दीन चित्राल, जो भारतीय राष्ट्रीय सेना के एक प्रतिबद्ध अधिकारी थे,उनका निधन 1996 में हुआ

देश आपकी सेवावो का सदैव ऋणी रहेगा


संदर्भ- 1)THE IMMORTALS

लेखक syed naseer ahmed

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संकलन तथा अनुवादक लेखक अताउल्ला खा रफिक खा पठाण सर टूनकी तालुका संग्रामपूर जिल्हा बुलढाणा महाराष्ट्र

9423338726

Updated : 31 March 2021 3:59 AM GMT
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